Friday, March 6, 2015

RT @KrAnubhavJha: लिखते रहे हैं तुम्हे रोज़ ही मगर.. ख्वाहिशों के ख़त कभी भेजे ही नहीं



RT @KrAnubhavJha: लिखते रहे हैं तुम्हे रोज़ ही मगर.. ख्वाहिशों के ख़त कभी भेजे ही नहीं (via Twitter http://ift.tt/1wNO48v)