RT @KrAnubhavJha: पज़मुर्दगी-ए-गुल पे हँसी जब कोई कली ... आवाज़ दी ख़िज़ाँ ने कि तू भी नज़र में है. पज़मुर्दगी -ए-गुल= फूल की उदासी
RT @KrAnubhavJha: पज़मुर्दगी-ए-गुल पे हँसी जब कोई कली ... आवाज़ दी ख़िज़ाँ ने कि तू भी नज़र में है. पज़मुर्दगी -ए-गुल= फूल की उदासी (via Twitter http://ift.tt/1HeXQ2n)